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विश्व में कृषि के प्रकार | Types of Agriculture in the world

विश्व में कृषि के प्रकार का अध्ययन, यथार्थ कृषि, अनुवांशिक कृषि, जैविक कृषि आदि।
विश्व में कृषि के प्रकार

कृषि का अर्थ-

  • कृषि शब्द के लिए अंग्रेजी में एग्रीकल्चर, फार्मिंग, कल्टीवेशन शब्द का प्रयोग किया जाता है।
  • अंग्रेजी में एग्रीकल्चर शब्द की रचना में "एगर" व कल्चरा दो शब्दों से मिलकर बना है।
  • एगर का तात्पर्य खेत या भूमि के टुकड़े से है तथा कल्चरा का अर्थ खेत या फसल की देखभाल करना है।

कृषि के प्रकार-

कृषि को वर्गीकृत करने के कई आधार है जो नीचे दिए जा रहे है-

(A) मिट्टी परिसम्पत्ति की रक्षा के आधार पर मिट्टी का वर्गीकरण- 

जिम्मरमैन ने मिट्टी संसाधन की रक्षा करते हुए कृषि को निम्नलिखित भागों में बांटा है-

1. यथार्थ एवं मिथ्या कृषि-

  • यथार्थ कृषि में मृदा संपदा को बर्बाद किए बिना कृषि कार्य किया जाता है।
  • इसका मतलब यह हुआ कि कृषि कार्य करते हुए यह ध्यान रखा जाता है की मृदा की उर्वरता और गुणवत्ता बनी रहे ताकि अगली फसल के लिए अच्छी मृदा उपलब्ध रहे।
  • यथार्थ एवं मिथ्या कृषि विश्व के कई भागों में देखने को मिलता है जैसे यथार्थ चीन और जापान में अधिक देखने को मिलती है।
  • मिथ्या कृषि यथार्थ कृषि के विपरीत है जिसमे मृदा की उर्वरता का ध्यान नही रखा जाता चले मिट्टी को उर्वरता ह्रास होती रहे।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका में इस प्रकार की कृषि देखने को मिलती है।

2. अनुवांशिकी एवं निकर्षणीय कृषि-

  • जिस कृषि में मिट्टी व दूसरे संसाधनों की बर्बादी को नजरंदाज करते हुए खेती की जाती है उसे निकर्षणीय कृषि कहा जाता है।
  • इस कृषि में मृदा उपजाऊ तत्वों को अवशोषित कर लेती है और अगली फसल में अधिक लाभ नही मिल पाता है।
  • जिस प्रकार की कृषि में मृदा के संसाधन व अन्य चीजों को ध्यान में रख कर फसलों का उत्पादन किया जाता है उसे अनुवांशिकी कृषि कहते है।

3. शुद्ध एवं संकर (हाइब्रिड) कृषि-

  • शुद्ध कृषि में किसान अपनी परम्परागत तरीकों से कृषि कार्य करता है।
  • इसमें लकड़ी के औजार, मानवीय श्रम तथा घरेलू खाद आदि का प्रयोग किया जाता है।
  • संकर कृषि में आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक का उपयोग होता है।
  • इसमें कृषि केवल जीवनयापन के लिए नही की जाती अपितु व्यवसायिक रूप से अच्छा लाभ प्राप्त करने के लिए की जाती है।
  • संकर कृषि में कृषकों का सीधे कृषिगत उद्योगों से संबंध होता है।
  • इस प्रकार की कृषि संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप के विभिन्न विकसित देशों में की जाती है।

(B) भूमि की उपलब्धता के आधार पर कृषि का वर्गीकरण-

1. गहन या सघन कृषि-

  • यह कृषि उन क्षेत्रों में की जाती है जहां कृषि भूमि की उपलब्धता काफी कम है।
  • इस तरह की कृषि में पर जनसंख्या का काफी दबाव होता है।
  • भारत, चीन, जापान, जर्मनी, नीदरलैंड्स देशों में की जाती है।
  • गहन कृषि में खाद्यानों के उत्पादन पर अधिक जोर होता है।
  • इसमें वैज्ञानिक तकनीकों का भी उपयोग किया जाता है जिससे ज्यादा से ज्यादा उत्पादन किया जा सके।

2. विस्तृत या विरल खेती-

  • कम जनसंख्या वाले क्षेत्रों में भूमि की उपलब्धता प्रति व्यक्ति अधिक होती है।
  • इन क्षेत्रों में कृषि को विरल खेती कहते है।
  • इस कृषि में मशीनों को प्रयोग ज्यादा किया जाता है।
  • वही विस्तृत कृषि में मानवीय श्रम का प्रयोग कम किया जाता है और उत्पादन को बाजार तक भेज दिया जाता है।
  • इस तरह की कृषि संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटाइना, रूस, ब्राजील में विस्तृत खेती की जाती है।

(C) मिट्टी में जल की पूर्ति या आर्द्रता के आधार पर कृषि का वर्गीकरण-

1. आर्द्र कृषि-

  • आर्द्र कृषि विश्व के उन में होती है जहां वर्षा 100-200 से.मी. के बीच होती है।
  • इन भागों में फसलों को उगाने के लिए मिट्टी में पर्याप्त मात्रा में आर्द्रता होती है।
  • उत्तर पूर्वी भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका देशों में इस तरह की खेती की जाती है।

2. सिंचित कृषि-

  • जिन भागों में वर्षा की अनिश्चिता, अनियमितता या अपर्याप्तता के कारण फसलों को उगने के लिए कृत्रिम रूप से सिंचाई की आवश्यकता होती है।
  • मानसूनी जलवायु वाले क्षेत्रों में सिंचाई के द्वारा ही विभिन्न फसलों का उत्पादन किया जाता है।
  • इनमे चांवल, गेंहू, गन्ना, कपास आदि फसलें आती है।
  • गंगा के मैदान, नील नदी के मैदान, यांग्त्सीक्यांग के मैदानी भागों में कृषि सफलता का कारण सिंचाई की उपलब्धता ही है।

3. शुष्क कृषि-

  • शुष्क कृषि उसे कहा जाता है जहां वर्षा 50 से.मी. से भी कम होती है।
  • यहां सिंचाई की भी सुविधा का अभाव होता है।
  • इन भागों में शुष्क कृषि अपनाई जाती है।

(D) शस्य पद्धति (क्रॉपिंग सिस्टम) के आधार पर कृषि-

1. एक फसली कृषि-

  • इस तरह की कृषि में पूरे साल में सिर्फ एक फसल ही उगाई जाती है।
  • भारत के असम में चाय, इंडोनेशिया और मलेशिया के रबर की खेती, ब्राजील में कहवा, क्यूबा में गन्ना की खेती एक फसली कृषि के अच्छे उदाहरण है।

2. दो फसली कृषि-

  • इस पद्धति में एक वर्ष में एक खेत से दो फसल उगाई जाती है।
  • चीन, जापान, दक्षिणी भारत, तथा बांग्लादेश के अधिकांश भागों में इस तरह की कृषि की जाती है।

3. बहु फसली कृषि-

  • इस तरह की कृषि में एक ही कृषि भूमि में एक वर्ष में अधिक से अधिक फसल लेने का प्रयास किया जाता है।
  • इस कृषि में अधिक उपज देने वाली बीजों, खाद, अच्छी सिंचाई सुविधा फसल चक्र की विधियों को अपनाया जाता है।
  • बड़े शहरों के पास में होने वाली साक सब्जियों को खेती बहु फसली कृषि है।

(E) कृषि उत्पादन के उद्देश्य के आधार पर कृषि का वर्गीकरण-

1. निर्वाह कृषि-

  • निर्वाह कृषि स्थानीय केवल स्थानीय आवश्यकता की पूर्ति के लिए किया है।
  • इस तरह की कृषि में ज्यादातर खाद्य फसलों का उत्पादन किया जाता है।
  • शुष्क भागों में गेहूं, ज्वार बाजरा, तथा मक्का एवं आर्द्र क्षेत्रों में चांवल की खेती की जाती है।
  • निर्वाह कृषि प्राचीन ढंग से की जाती है जो परम्परागत रूप सालों से चली आ रही है।
  • भारत, चीन, जापान, इंडोनेशिया, बांग्लादेश में निर्वाह कृषि किया जाता है। 

2. व्यापारिक कृषि-

  • व्यापारिक कृषि में फसलों को बाजार में बेचकर अधिक से अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए की जाती है।
  • इस प्रकार की कृषि में उगाई गई फसलों का उपभोग विश्व के किसी जगह पर किया जा सकता है।
  • कृषि फसलों का लेन देन विभिन्न राष्ट्रों के साथ होता है।
  • इस तरह की कृषि से किसानों की आर्थिक दशा में सुधार होता है।

3. बगाती कृषि-

  • इस प्रकार की कृषि में फसलों के उगाने से संबंधित क्रियाओं पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता है।
  • मलेशिया, इंडोनेशिया, भारत, क्यूबा, फिजी, श्रीलंका, पूर्वी अफ्रीका, गिनी तथा ब्राजील में बगाती कृषि की जाती है।
  • प्रमुख फसलों में रबर, गरम मसाला, केला, चाय, कहवा, गन्ना, अनानास, नारिया आदि है।

(E) क्षेत्र के आधार पर कृषि का वर्गीकरण-

1. मानसूनी कृषि-

  • मानसूनी जलवायु वाले भागों पर की जाने वाली कृषि को मानसूनी कृषि कहते है।
  • इन क्षेत्रों में ज्यादातर दक्षिणी एशियाई देश तथा दक्षिणी पूर्वी एशियाई देश आते है।
  • इन देशों में भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, म्यांमार, वियतनाम, थाईलैंड, लाओस, कंबोडिया, दक्षिण चीन आदि आते है।
  • अन्य देशों में उत्तरी ऑस्ट्रेलिया, पूर्वी अफ्रीका तथा मैक्सिको की खड़ी में मानसूनी कृषि की जाती है।
  • मानसूनी कृषि में चांवल ही एक प्रमुख फसल है जिसकी खेती ज्यादा की जाती है क्योंकि इसे पानी की आवश्यकता अधिक होती है और पानी के लिए मानसूनी जल एक अच्छा साधन है।

2. भूमध्यसागरीय कृषि-

  • भूमध्यसागरीय जलवायु वाले क्षेत्रों में की जाने वाली कृषि को भूमध्यसागरीय कृषि कहते है।
  • इस तरह की कृषि में फल व सब्जियों का उत्पादन अधिक होता है।
  • इस तरह की कृषि उत्तरी अफ्रीकी देशों अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, मोरक्को में भूमध्यसागरीय कृषि की जाती है।

3. उत्तर पश्चिम यूरोप की मिश्रित कृषि-

  • उत्तर पश्चिम यूरोप की कृषि विश्व के अन्य भागों की तुलना में भिन्न मिलता है।
  • इनमे खाद्यान्न, कंद फसलें, घांस आदि की फसलें ली जाती है।
  • यहां की कृषि में तकनीक का अत्यधिक उपयोग किया जाता है।
  • सुदृढ़ परिवहन साधन, बाजार की उपलब्धता, उचित मूल्य आदि से यहां के किसान अधिक लाभ प्राप्त करते है।
  • फसलों के अलावा यहां पशु पालन भी किया जाता है।

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Namaste! I'm sudhanshu. I have done post graduation in Geography. I love blogging on the subject of geography.

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