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विश्व के मछ्ली संसाधन का वर्णन | Description of the fish resources of the world

विश्व में मत्स्य संसाधन
विश्व में मछली संसाधन

भूमिका:

  • मछ्ली पकड़ना आदि काल से मानव सभ्यता का अभिन्न अंग रहा है।
  • वैसे तो मानव ने आज के समय मे अपने भोजन के लिए अनेक भोज्य पदार्थ का विकास कर लिया परंतु मछ्ली को आज भी भोजन के लिए एक प्रमुख पौष्टिक भोजन के रूप मे प्रयोग किया जाता है।
  • वर्तमान समय मे मानव भोजन मे मछ्ली का योगदान लगभग 3% तक है।
  • नॉर्वे, स्विट्जरलैंड, इंग्लैंड, जापान, स्कॉटलैंड, न्यूफाउंडलैंड, जैसे देशों के तटीय भागों मे कृषि भूमि की काफी कमी देखनों को मिलती है।
  • इन देशों मे मछ्ली ही प्रमुख खाद्य पदार्थ और व्यवसाय का साधन है।

मत्स्य प्रकार के आधार पर मत्स्य उत्पादन (2007)-

मछलियों के प्रकार उत्पादन (टन में)
ताजे पानी में रहने वाली मछलियां 8,718
डायड्रोमस मछली 1,785
समुद्री मछलियां 65,709
क्रसटेशियन 5,840
घोंघे 7,564
अन्य 449

मछली पकड़े में विश्व के विभिन्न देशों का योगदान-

देश मत्स्य पकड़ने का प्रतिशत
पूर्व सोवियत संघ 11.3%
जापान 11.1%
सं. रा. अमेरिका 5.7%
भारत 3.6%
दक्षिण कोरिया 2.8%
थाईलैंड 2.8%
फिलिपिंस 2.1%
डेनमार्क 1.9%
नॉर्वे 1.9%
कनाडा 1.5%
आइसलैंड 1.5%

मत्स्य उत्पादन के लिए अनुकूल दशाएं:

1. प्लैंकटन की पूर्ति-

  • प्लैंकटन एक छोटी से वनस्पति है।
  • मछलियां इसी प्लैंकटन पर जिंदा रहती है।
  • प्लैंकटन के विकास के लिए लगभग 200 मीटर से कम समुद्री जल की गहराई उपयुक्त रहता है।
  • प्लैंकटन के विकास के लिए यह भी आवश्यक है कि जल मे हानिकारक रासायनिक पदार्थ नहीं होने चाहिए।
  • समुद्र तटीय भागों मे मछ्ली पकड़ने के लिए ज्यादा अनुकूल है।
समुद्री जीव की आहार श्रृंखला
समुद्री जीव की आहार श्रृंखला

2. ठंडी जलवायु-

  • मछ्ली के ज्यादा से ज्यादा उत्पादन के लिए ठंडी जलवायु होना अधिक अनुकूल है।
  • ठंडी जलवायु मे मछ्ली पकड़ना ज्यादा सुविधाजनक है।
  • पकड़ी गई मछ्ली ज्यादा खराब नहीं होती और मछलियों को प्राकृतिक रूप से शीत भंडार मिल जाता है।
  • शीतोष्ण जलवायु वाले देशों के पास उच्च वैज्ञानिकता प्राविधिकी होती है।
  • ऐसे देशों मे प्रशीतन और डिब्बाबंदी की उच्च गुणवत्ता वाली सुविधाएं है।

3. भौतिक एवं पर्यावरणीय प्रभाव-

  • मछ्ली पकड़ने के लिए नेचुरल रूप से कटी-फटी तट रेखा आदर्श स्थान माना जाता है।
  • एस्चुरीयों, खाड़ियों आदि मे मछलियों को पकड़ने वाले जहाजों को शरण मिल जाता है।
  • ग्रिम्सबी, रिकजाविक, सेंटजान्स (न्यूफाउंडलैंड) ऐसे ही बंदरगाह है।
  • तटीय भाग मे पायी जाने वाली उबड़-खाबड़ भूमि होने से ऐसे क्षेत्रों मे कृषि काफी कम होती है।
  • नॉर्वे, होकैडो, आइसलैण्ड, न्यूफाउंडलैंड, अलास्का ऐसे ही क्षेत्र है।
  • यहाँ मछ्ली पकड़ना एक प्रमुख व्यवसाय है।

4. विशाल जनसंख्या-

  • मछ्ली पकड़ने का व्यवसाय काफी मेहनत का काम है।
  • इसके लिए परिश्रमी व कुशल के साथ ज्यादा जनसंख्या की भी जरुरत होती है।
  • मछलियों को काटना, साफ करना, नमक लगाना, सुखाना, डिब्बा मे बंद करना इन सब के लिए पर्याप्त लोगों की जरुरत होती है।
  • अतः यह व्यवसाय अधिक सफल उन स्थानों मे होता है जहाँ जनसंख्या अधिक होती है।
  • पाश्चिम यूरोप, संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन व जापान कर तटीय भागों मे जनसंख्या सघन है।

5. गर्म और ठंडी जलधारा का मिलन-

  • महासागर मे जहाँ भी गर्म और ठंडी जलधारा का मिलन होता है वहाँ कोहरा की स्थिति बन जाती है ऐसे जगहों मे मछ्ली पकड़ना आसान होता है।
  • क्योंकि इस स्थान पर जब गर्म तापमान वाले जल से मछलियां ठंडी तापमान वाले जल मे मिलती है तो उन्हें काफी सुकून मिलता है और मछलियां इस सुकून को लेने के लिए जल के ऊपरी भाग पर आ जाती है है जिससे मछुआरों को मछ्ली पड़ना आसान हो जाता है।
  • प्रशांत महासगर मे जापान तट के पास ठंडी क्यूराइल तथा गर्म क्यूरोसिगो धाराएं मिलती है जहाँ घना कोहरा होता है।
  • इसके आलावा अटलांटिक महासगर मे ठंडी जलधारा लेब्राडोर एवं गर्म गल्फ स्ट्रीम न्यूफाउंडलैंड के पास मिलती है जहां काफी ज्यादा कोहरा हो जाता है।

6. विकसित नाविक कला तथा तीव्रगामी परिवहन साधन-

  • ऐसे देशों मे जहाँ मछ्ली पकड़ने के लिए आधुनिक कला और उपकरण के साथ परिवहन के तीव्रगामी साधन है वे मछ्ली के उद्योग मे बहुत अधिक सफल होते है।
  • नॉर्वे, जापान, कनाडा, फ्रांस, इंग्लैंड, आदि विकसित देश होने के कारण इनके पास विकसित नाविक कला है।
  • जापान और नॉर्वे ने तो मछ्ली मारने वाले आधुनिक उपकरण जैसे ट्रालरो, सीनरों, स्टीमरों, ड्रिफ्टर्स आदि का विकास किया है जिससे मछ्ली मारने मे आसानी होती है।

मछ्ली पकड़ने की ड्राफ्टिंग विधि-

ड्राफ्टिंग विधि
ड्राफ्टिंग विधि

मछ्ली पकड़ने की ट्रालिंग विधि-

ट्रालिंग विधि
ट्रालिंग विधि

मछली की प्रजातियां:

1. खारे जल की मछलियां-

  • इस तरह की मछलियां ज्यादातर महासागरीय में पाई जाती है।
  • इन मछलियों में मैकरेल, हेरिंग, सारडाइन, पिल्चार्ड, ब्रिसलिंग, व्हाइट फिश फ्लैट फिश आदि है।

2. ताजे जल की मछलियां-

  • ऐसी मछलियां जो सागरों, झीलों, तालाबों, नदियों आदि में पकड़ी जाती है उनको ताजे जल में मछली पकड़ना कहा जाता है।
  • चीन, जापान, रूस, पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि देशों में ताजे जल की मछलियां पकड़ी जाती है।
  • कार्प और स्टूरजिआन ताजे जल की प्रमुख मछलियां है।

3. नदी जल की मछलियां-

  • प्रवाहित नदियों में पकड़ी जाने वाली मछली को नदी जल की मछली कहते है।
  • इन मछलियों में सालमन मछली सबसे प्रमुख है।
  • सालमन मछली कुछ प्रजातियां इस तरह है- चिनूक, सोकेये, सिल्वर, चूम आदि है।
  • लगभग १०० वर्षों से सालमन मछली को अमेरिका और कनाडा के तटीय भाग में पकड़े काम चल रहा है।
  • अब अलास्का में सालमन मछलियां पकड़ी जाती है।

विश्व के प्रमुख मत्स्य क्षेत्र:

  • हम जानते है कि मछलियों के लिए आदर्श जगह वह है जहां प्लैंकटन की पर्याप्त मात्रा हो इसलिए महासागरों में मछलियां ज्यादातर तटीय जल मग्न भागों में पाए जाते है।
  • लगभग 80-85% मछलियां शीतोष्ण जलराशियों में पकड़ी जाती है जो उत्तरी गोलार्ध में है।
विश्व के प्रमुख मत्स्य क्षेत्र
विश्व के प्रमुख मत्स्य क्षेत्र

1. उत्तर पूर्वी अटलांटिक पश्चिमी यूरोप तट-

A. आइसलैंड-

  • आइसलैंड सिर्फ मछली का निर्यात 90% तक करता है।
  • यहां की आबादी का 2-2½ प्रतिशत लोग सिर्फ मछली व्यवसाय से जुड़े है।
  • आइसलैंड का विश्व मछली उत्पादन में योगदान 1.5% का है।

B. नॉर्वे-

  • मछली पकड़ने में नॉर्वे भी एक प्रमुख उत्तर पूर्वी अटलांटिक देश है।
  • यह देश विश्व के मछली का 2% पकड़ता है।
  • यहां हेरिंग प्रजाति की मछलियां ज्यादा है लगभग 65% इसी प्रजाति की मछलियां पकड़ी जाती है।
  • यहां लगभग 1610 कि. मी. की लंबी तटरेखा है जहां मछली पकड़ी जाती है।

C. ब्रिटिश द्वीप-

  • ग्रेट ब्रिटेन भी उत्तर पूर्वी अटलांटिक जल राशि में एक प्रमुख मत्स्य पकड़ देश है।
  • यहां के गहरे सागरीय भाग में मछलियां पकड़ी जाती है।
  • ब्रिटेन में ट्रालरों की मदद से मछलियां पकड़ी जाती है।
  • यहां सबसे अधिक कॉड 40%, हैडक 17% एवं प्लेस 10% मछलियां पकड़ी जाती है।
  • ब्रिटेन में मछली व्यवसाय को प्रोत्साहन देने के लिए एंगलिंग खेल का आयोजन किया जाता है।

D. अन्य यूरोपीय देश-

  • इन सभी प्रमुख मत्स्य देशों के अलावा यूरोप में स्पेन, पुर्तगाल, इटली में भी मछलियां पकड़ी जाती है।
  • थोड़ी बहोत मछलियां जर्मनी, डेनमार्क, स्वीडन, बेल्जियम, नीदरलैंड, पोलैंड एवं बाल्टिक सागर में पकड़ी जाती है।

2. उत्तर पश्चिम अटलांटिक-

  • इस क्षेत्र में लेब्रेडोर तथा गल्फस्ट्रीम जो क्रमशः ठंडी व गर्म जल धारा है उत्तर पश्चिम अटलांटिक में ही इनका मिलन होता है।
  • इस क्षेत्र में दो प्रमुख देश कनाडा और सं. रा. अमेरिका है जहां मछलियां पकड़े जाते है।
  • कनाडा और सं. रा. अमेरिका को मिलाकर लगभग 8 हजार किलोमीटर की लंबी तट रेखा है।
  • इस तट रेखा 5 लाख 20 हजार वर्ग किलेमीटर का मत्स्य क्षेत्र है।
  • इस क्षेत्र में लगभग 450 वर्षों से मछली पकड़ी जाती है।
  • यह क्षेत्र कॉड मछली के लिए प्रसिद्ध है।
  • कॉड के अतिरिक्त हेरिंग, मैकरेल आदि मछली है।

3. उत्तर पूर्वी प्रशांत क्षेत्र-

  • उत्तर पूर्वी प्रशांत के मत्स्य क्षेत्र में अलास्का से लेकर कैलिफोर्निया तक लगभग 11 हजार 200 किलोमीटर तट रेखा है जहां मछली पकड़ने का काम होता है।
  • यहां सालमन मछली सबसे अधिक पकड़ी जाती है।

4. उत्तर पश्चिम प्रशांत क्षेत्र-

  • इसका विस्तार बेरिंग सागर से लेकर चीन सागर तक है।
  • इसे विश्व का सबसे बड़ा मत्स्य क्षेत्र माना जाता है।
  • जापान इस क्षेत्र में सबसे प्रमुख मछली उत्पादक देश है।
  • जापान तट के पास ठंडी जलधारा क्यूराल और गर्म जलधारा क्यूरोसियो मिलती जो मछली पकड़ने के लिए आदर्श मानी जाती है।

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Namaste! I'm sudhanshu. I have done post graduation in Geography. I love blogging on the subject of geography.

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